विल्सन अब अपने रेगुलर जॉब से ऊब चुका था। तीन घंटे काम, घर लौटना, खाना और फिर सो जाना — यही उसकी दिनचर्या थी। उसे अपनी ज़िंदगी में कुछ नया, कुछ रोमांच चाहिए था। एक दिन उसने अचानक फैसला किया — वो अपना सामान पैक करके मुंबई जाएगा। वो अमेरिका में रहता था, इसलिए यात्रा लंबी थी, लेकिन एक दिन में वह मुंबई पहुँच गया। विल्सन ने ताज होटल में ठहरने का निश्चय किया। हर सुबह वह अपना कैमरा लेकर गेटवे ऑफ़ इंडिया चला जाता, जहाँ वह तस्वीरें खींचता, लोगों को देखता, और शहर के रंगों में खो जाता था।
अंतरा - भाग 1
“अंतरा”भाग १विल्सन अब अपने रेगुलर जॉब से ऊब चुका था।तीन घंटे काम, घर लौटना, खाना और फिर सो जाना यही उसकी दिनचर्या थी।उसे अपनी ज़िंदगी में कुछ नया, कुछ रोमांच चाहिए था।एक दिन उसने अचानक फैसला किया —वो अपना सामान पैक करके मुंबई जाएगा।वो अमेरिका में रहता था, इसलिए यात्रा लंबी थी,लेकिन एक दिन में वह मुंबई पहुँच गया।विल्सन ने ताज होटल में ठहरने का निश्चय किया।हर सुबह वह अपना कैमरा लेकर गेटवे ऑफ़ इंडिया चला जाता,जहाँ वह तस्वीरें खींचता, लोगों को देखता,और शहर के रंगों में खो जाता था।--- अंतरा का संघर्षअंतरा जब पहली बार मुंबई आई थी,तो ...और पढ़े
अंतरा - भाग 2
अंतरा भाग 2लौटता सवेरा(लेखक – राज फुलवरे)अध्याय एक – खत जो लौट आयामुंबई की हवा में आज कुछ अलग —अरब सागर की लहरें किनारों से टकरा रही थीं,गेटवे ऑफ इंडिया के पास भीड थी,पर अंतरा के दिल में सन्नाटा.छोटे- से किराए के कमरे में अंतरा अपनी माँ शारदा देवी और छह महीने की बच्ची विल्वी के साथ रहती थी.कमरा छोटा था, पर दीवारों पर विल्सन की तस्वीरें लगी थीं — वही विदेशी फोटोग्राफर, जिसने पहली बार उसे कैमरे में कैद किया था, और फिर दिल में.वह कपडे सुखा रही थी, तभी दरवाजे पर दस्तक हुई.> पोस्टमैन: अंतरा मिश्रा? आपका ...और पढ़े