एपिसोड 1: पहली नज़र एक छोटा-सा गाँव था — हरियाली से घिरा हुआ, जहाँ लोग एक-दूसरे को नाम से जानते थे। उसी गाँव में एक प्राइमरी स्कूल था, लाल ईंटों से बना, पुराने ज़माने की घंटी और मिट्टी का आँगन। इसी स्कूल में पढ़ते थे दो बच्चे—सीमा और निर्मल। सीमा नौ साल की थी। दो चोटियों में लाल रिबन बाँधकर रोज़ समय पर स्कूल आती। उसकी आँखों में मासूमियत थी और स्वभाव में सादगी। निर्मल दस साल का था—शरारती लेकिन दिल का साफ़। वो अक्सर देरी से आता, लेकिन उसके चेहरे पर हमेशा एक मुस्कान रहती।
Full Novel
बचपन का प्यार - 1-2
लेखक: बिकाश पराजुलीमुख्य पात्र: सीमा और निर्मलएपिसोड 1: पहली नज़रएक छोटा-सा गाँव था — हरियाली से घिरा हुआ, जहाँ एक-दूसरे को नाम से जानते थे। उसी गाँव में एक प्राइमरी स्कूल था, लाल ईंटों से बना, पुराने ज़माने की घंटी और मिट्टी का आँगन। इसी स्कूल में पढ़ते थे दो बच्चे—सीमा और निर्मल।सीमा नौ साल की थी। दो चोटियों में लाल रिबन बाँधकर रोज़ समय पर स्कूल आती। उसकी आँखों में मासूमियत थी और स्वभाव में सादगी।निर्मल दस साल का था—शरारती लेकिन दिल का साफ़। वो अक्सर देरी से आता, लेकिन उसके चेहरे पर हमेशा एक मुस्कान रहती।उनकी पहली ...और पढ़े
बचपन का प्यार - 3-4
एपिसोड 3: नई लड़की, नई हलचलगाँव के स्कूल में उस दिन कुछ अलग था। क्लास शुरू होने से पहले सब बच्चे कानाफूसी कर रहे थे।“नई लड़की आई है… शहर से!” – किसी ने कहा।सीमा और निर्मल दोनों हैरान थे। तभी हेडमास्टर कक्षा में एक लड़की को लेकर आए।“बच्चों, ये है ‘नेहा’। अभी-अभी शहर से हमारे गाँव आई है और अब यहीं पढ़ेगी।”नेहा दिखने में बहुत साफ-सुथरी और स्मार्ट थी। बाल खुले, स्कूल ड्रेस चमचमाती हुई, और पैरों में सफेद जूते। शहर की चमक उसमें साफ झलक रही थी।टीचर ने उसे सीमा और निर्मल के बेंच पर बैठा दिया।निर्मल की ...और पढ़े
बचपन का प्यार - 5-6
एपिसोड 5: अधूरा ख़तस्कूल में वो सुबह कुछ अलग थी। सीमा हमेशा की तरह समय पर आई, लेकिन उसकी अब खो चुकी थी। न कोई बात, न कोई शरारत — अब वो बस क्लास में बैठती, पढ़ाई करती, और चुपचाप घर चली जाती।निर्मल ने कई बार कोशिश की उससे बात करने की, लेकिन सीमा अब बिल्कुल अनजान बन चुकी थी।निर्मल की उलझननिर्मल को समझ नहीं आ रहा था कि उसने क्या इतना बड़ा गुनाह कर दिया?“एक छाता ही तो था… पर शायद वो सिर्फ छाता नहीं था,” अब उसे एहसास हो रहा था।वो अकेले बेंच पर बैठा, एक कागज़ ...और पढ़े
बचपन का प्यार - 7-8
एपिसोड 7: गाँव का मेला और छुपा हुआ तोहफागाँव में हर साल लगने वाला मेला इस बार कुछ खास में घोषणा हुई"जो छात्र अपनी कला या क्राफ्ट प्रदर्शनी में प्रस्तुत करेगा, उसे इनाम मिलेगा!"सीमा और निर्मल दोनों उत्साहित थे।सीमा ने घर आकर माँ से कहा,"इस बार मैं अपने पेंटिंग्स मेले में लगाऊंगी।"निर्मल ने पेड़ की लकड़ियों से कुछ बनाना शुरू कियाएक छोटा सा लकड़ी का घर जिसमें उसकी यादें थीं।एक अनदेखा तोहफामेले का दिन आ गया।चारों तरफ रौनक थी। झूले, गोलगप्पे, बांसुरी वाले, रंग-बिरंगे झंडे और बच्चों की हँसी।सीमा की पेंटिंग्स सबको बहुत पसंद आईं —खासतौर पर एक पेंटिंग ...और पढ़े