> "कुछ लोग पहली बार में दिल में बस जाते हैं, और फिर हर लम्हा... उन्हीं से मुलाक़ात होती रहती है।" --- लखनऊ यूनिवर्सिटी की वो गुलाबी सर्दियां थीं, जब धूप सिर्फ़ तन को नहीं, दिल को भी छूती है। कॉलेज की लाइब्रेरी की सीढ़ियों पर बैठी ज़ारिन अपने जज़्बातों से लड़ रही थी। एक तरफ उसकी किताबें थीं, दूसरी तरफ वो चेहरा… जो उसकी सोच से निकल ही नहीं रहा था—आरिज़।
तुमसे पहले तुमसे बाद - 1
--- उपन्यास: "तुमसे पहले तुमसे बाद" लेखिका: सायका अजमत अध्याय 1: पहली झलक> "कुछ लोग पहली बार में दिल बस जाते हैं,और फिर हर लम्हा... उन्हीं से मुलाक़ात होती रहती है।"---लखनऊ यूनिवर्सिटी की वो गुलाबी सर्दियां थीं, जब धूप सिर्फ़ तन को नहीं, दिल को भी छूती है।कॉलेज की लाइब्रेरी की सीढ़ियों पर बैठी ज़ारिन अपने जज़्बातों से लड़ रही थी।एक तरफ उसकी किताबें थीं, दूसरी तरफ वो चेहरा… जो उसकी सोच से निकल ही नहीं रहा था—आरिज़।--- "तू फिर से खो गई…"नीलोफ़र, उसकी सबसे क़रीबी दोस्त, उसे गौर से देख रही थी।"ज ...और पढ़े
तुमसे पहले तुमसे बाद - 2
--- अध्याय 2: ख़्वाबों में तेरा नाम---1. सर्द हवाओं में दिल की दस्तकलखनऊ की शामें वाकई कुछ अलग होती धीरे-धीरे शहर के बुज़ुर्ग मकानों की छतों पर उतरती, फिर सायों में घुल जाती। हवा में समोसे की खुशबू, हँसी के टुकड़े, और कॉलेज की घंटी की अनसुनी आवाज़ हर तरफ तैर रही थी।ज़ारिन एक कोने में बैठी अपनी डायरी में कुछ लिख रही थी। उसके पन्नों पर सिर्फ अल्फाज़ नहीं थे — उसकी धड़कनें थीं। उसके दिल की धड़कनें अब एक नाम पर अटक जाती थीं — आरिज़।> “नीलो, क्या कभी तुमने किसी की आँखों में बसी ख़ामोशी से ...और पढ़े
तुमसे पहले तुमसे बाद - 3
--- अध्याय 3: फ़ासलों का इम्तिहान---“मोहब्बत सिर्फ पास रहने से नहीं निभती,कभी-कभी दूर रहकर भी दिल के तार जुड़ हैं। लेकिन…”“…अगर खामोशी लंबी हो जाए, तो मोहब्बत भी घुटने लगती है।”---1. बदले हुए पलकॉलेज फेस्ट के बाद ज़िंदगी थोड़ी बदल गई थी।ज़ारिन जब भी क्लास में बैठती, उसकी नज़रें अनजाने में आरिज़ को ढूँढ लेतीं।लेकिन अब वो दूरी बना रहा था। न तबले की थाप सुनाई देती, न वो मुस्कुराहट मिलती जिसे ज़ारिन अब पहचानने लगी थी।> “क्या मैं कुछ गलत समझी?”ज़ारिन खुद से सवाल करती,“या ये फासला भी कोई इम्तिहान है?”---2. एक नई दस्तकवही दिनों में कॉलेज में ...और पढ़े