यशस्विनी 21वीं सदी में महिलाओं की बदलती भूमिकाविषय पर एक आलेख लेखन में व्यस्त है।अपने लैपटॉप पर हेडफोन से वॉइस टाइपिंग करने केसमय वह कई बार भावनाओं में डूबती- उतरती रही। उसने यह महसूस किया कि 21वीं सदी मेंमहिलाएं अंतरिक्ष में बड़ी छलांग लगाने को तैयार हैं और जीवन का ऐसा कौन सा क्षेत्रहै, जहां उन्होंने अपनी पहचान स्थापित नहीं की है, अपनी योग्यता सिद्ध नहीं की है,वहींमहिलाओं के विरुद्ध देश में ज्यादती की बढ़ती घटनाओं पर वह बार-बार व्यथित भी होतीरही। वह शहरके कृष्ण प्रेमालय सामाजिक संस्थान

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लघु उपन्यास यशस्विनी(देह से आत्मा तक) : अध्याय1 दंश और पीड़ा (1) यशस्विनी 21वीं सदी में महिलाओं बदलती भूमिकाविषय पर एक आलेख लेखन में व्यस्त है।अपने लैपटॉप पर हेडफोन से वॉइस टाइपिंग करने केसमय वह कई बार भावनाओं में डूबती- उतरती रही। उसने यह महसूस किया कि 21वीं सदी मेंमहिलाएं अंतरिक्ष में बड़ी छलांग लगाने को तैयार हैं और जीवन का ऐसा कौन सा क्षेत्रहै, जहां उन्होंने अपनी पहचान स्थापित नहीं की है, अपनी योग्यता सिद्ध नहीं की है,वहींमहिलाओं के विरुद्ध देश में ज्यादती ...और पढ़े

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अध्याय 2 स्मृति (3) यशस्विनी आज शाम को ऑफिस से जब घर पहुंची तो भी काम में उसका मन नहीं लग रहा था। घर लौटने के बाद एक कप चाय पीते हुए वह अखबारों में दिनभर की खबरों पर एक दृष्टि डालती है। यूं तो वह सुबह भी अखबार पढ़ लेती है लेकिन सरसरी तौर पर अभी वाले अखबार - पढ़ाई के समय में वह कुछ विशेष खबरों पर ध्यान केंद्रित करती है और उसे रुचिपूर्वक पढ़ती है। घर में नौकर चाकर से लेकर रसोईया तक सभी तैनात हैं लेकिन वह घर का सारा ...और पढ़े

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(5)यशस्विनी पढ़ने - लिखने में तेज थी। अनाथालय में रहने के दौरान वह अनाथालय की व्यवस्था के कार्य में ओर से पूरा सहयोग देती थी। रसोई में काम करना उसे पसंद था। अनाथालय के बच्चों के लिए भोजन बनाने के काम में वह आटा गूंधने से लेकर सब्जियां काटने के काम में स्वेच्छा से मदद किया करती थी। शाम को स्पेशल क्लास लगती थी, जिसमें वहां रहने वाले बच्चे यशस्विनी से अपने होमवर्क में आने वाली कठिनाइयों को पूछ कर दूर किया करते थे लेकिन इसके ...और पढ़े

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पिछले दिनों योग के एक सत्र की तैयारी के संबंध में एक फाइल देते समय जब रोहन का हाथ यशस्विनी के हाथों से हल्के से टकराया तो रोहन इस तरह झटक कर दूर हट गए जैसे उन्हें कोई हजार वाट का करंट लगा हो।दो मिनट तक उनके मुंह से क्षमा....सॉरी सॉरी....क्षमा..…सॉरी निकलता रहा।इस घटना का स्मरण कर यशस्विनी मुस्कुरा उठी।वह सोचने लगी कि रोहित जी आवश्यकता से अधिक संवेदनशील हैं। वैसे यह उनका स्वभाव ही है और ऐसे लोग बड़े ही साफ दिलवाले होते हैं।अपने हृदय के एक कोने में उसने रोहित के प्रति एक अलग तरह ...और पढ़े

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योग साधना के ढीले ढाले वस्त्र पहनकर यशस्विनी साधना के हाल में पहुंची। यह एक बड़ा खुला स्थान था एक साथ लगभग 100 लोग ध्यान और योग का अभ्यास कर सकते थे। मंच पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगा हुआ था। ऊपर ग्रीन ट्रांसपेरेंट शीट लगी हुई थी, जिससे बारिश की स्थिति में भी साधकों के योगाभ्यास पर कोई असर न पड़े। मंच को इस तरह साइड मूविंग विंगों के साथ बनाया गया था कि अगर प्रोजेक्टर चालू कर सफेद पर्दे पर कोई दृश्य दिखाना पड़े या पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन की आवश्यकता हो तो तत्काल मंच पर रोशनी को एकदम ...और पढ़े

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साधकों के मन में योग को लेकर अनेक जिज्ञासाएँ थीं। प्रारंभिक अभ्यास में ही यशस्विनी ने साधकों को प्राणायाम अभ्यास कराया । भस्त्रिका, कपालभाति से लेकर, बाह्य प्राणायाम, अनुलोम-विलोम, उज्जाई प्राणायाम, उद्गीथ प्राणायाम आदि सभी प्राणायाम साधकों ने मन से सीखे। यशस्विनी ने जब श्वास निश्वास की प्रक्रिया के लिए पूरक, कुंभक, रेचक और बाह्य कुंभक तथा श्वास लेने, छोड़ने तथा रोकने के निश्चित अनुपात की अवधारणा समझाई, तो साधक चमत्कृत रह गए। हर कहीं अनुशासन है। हमारे जीवन की भागदौड़ के कारण हमारे श्वांसों की गति भी अनियंत्रित है। अगर हम प्राणायाम के माध्यम से स्वांसों की साधना ...और पढ़े

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पिछले कई दिनों से अपने निज कक्ष में ध्यान के समय यशस्विनी को विचित्र तरह की अनुभूतियां होती हैं।जब लगता है कि आज मैं समाज के लिए कुछ उपयोगी कार्य कर पाऊंगी तो वह ध्यान के अंतिम चरण में बांके बिहारी जी का आह्वान करती है कि वह उसे आसपास के किसी जरूरतमंद व्यक्ति के बारे में बताएं ताकि अगर वह सक्षम हो तो उस व्यक्ति तक सहायता पहुंचा सके। थोड़ी देर के ध्यान के बाद यशस्विनी को दोपहर तक कोई खास प्रेरणा नहीं मिली।वह अपने दैनिक कार्यों ...और पढ़े

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" यार गोपी, अभी कौन पटाखे चलाता है। अभी तो शाम ही हुई है। जब रात होगी ना, तो चलाने में मजा आएगा।"" मेरे पास बहुत बड़ा दनाका बम है।" गोपी ने कहा।" मेरी मां भी राकेट लेकर आ रही है। देखना ऊपर बहुत दूर तक जाएगा वह रॉकेट।सीधे चंदा मामा को छूकर आएगा।" यह उत्तर सुनकर गोपी खिलखिला कर हंस पड़ा और दोनों मित्र दूसरी बातें करने लगे थे। गणेश को भूख भी लग रही थी। मां अभी तक नहीं पहुंची थी। वह मां के निर्देश के अनुसार घर में ही था और अब मां की प्रतीक्षा करते ...और पढ़े

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यशस्विनी को लेकर दोनों के मन में अत्यंत कोमल भावनाएं थीं।एक गहरा वात्सल्य भाव था और इसी के चलते यशस्विनी के छठवीं कक्षा में पहुंचने पर उसे समझाने की कोशिश करते हुए कहा कि हम दोनों तुम्हें गोद लेना चाहते हैं। दोनों की आंखों में स्नेह और वात्सल्य को यशस्विनी ने अनुभव किया था। अपनी 10-11 वर्ष की अवस्था होने तक उसने हर पल न सिर्फ अपने प्रति बल्कि अनाथालय के हर बच्चे के प्रति महेश और गुरु माता माया के लाड़-प्यार और दुलार को देखा था। अपनी शिक्षा पूरी होने और कैरियर निर्माण ...और पढ़े

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इसके बाद यशस्विनी ने साधकों से भी इस योग का अनुसरण करने के लिए कहा और प्रणाम आसन के दूसरे चरण में सांस खींचते हुए अपने दोनों हाथों को शरीर से पीछे की ओर उठाकर ले जाते हुए हस्त उत्तानासन मुद्रा धारण किया। उसने बताया कि यह शरीर की स्ट्रेचिंग है और एक तरह से यह वार्मअप वाली स्थिति है।जब श्वास छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर झुकते हुए पादहस्तासन की मुद्रा में हाथों से पैरों की अंगुलियों को छूने की बारी आई तो अनेक साधक गड़बड़ा गए।स्वयं रोहित को पूरी तरह से ...और पढ़े

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लघु उपन्यास यशस्विनी: अध्याय 11: अपने भीतर की यात्रा रोहित का का मन दुखी हुआ कि उसकी कारण यशस्विनी कितनी देर परेशान रही। उसने यशस्विनी को तत्काल संदेश भेजा ….क्षमाचाहता हूं यशस्विनी जी….आपको संदेश नहीं भेज पाया…. बात यह है कि आज एक रक्तदान कार्यक्रममें चले जाने के कारण मैंने अचानक बहुत कमजोरी महसूस की इसलिए... घर पर ही रुका हुआहूँ…. यशस्विनीने तुरंत फोन लगाकर अपनी नाराजगी व्यक्त की और कहा …. मुझे बुला लेते रोहित जी ...लेकिनअगले ही पल सुधारकर कहा -तो मुझे बता देते रोहित जी तो मैं किसी को आपके पास भेज देती…….और ...और पढ़े

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" दीदी आप क्या हमारे रोहित महोदय की कहानी सुना रही हैं?" साधकों का ऐसा अनुमान लगता यशस्विनी खिलखिला कर हंस पड़ी और रोहित झेंप गए क्योंकि जब उन्होंने बहुत ध्यान से यशस्विनी का यह व्याख्यान और प्रदर्शन देखा तो वे मन ही मन स्व-आकलन कर रहे थे।रोहित मुश्किल से पहले या दूसरे चक्र तक ही केंद्रित थे। उन्हें तीसरे चक्र के प्रभाव की अनुभूति भी कभी-कभी होती थी। अपनी आध्यात्मिक भावना, सज्जनता, ईमानदारी और मेहनत के कारण ही वे अनजाने ही इस दूसरे और तीसरे चक्र तक पहुंच पाए थे। एक साधक ने पूछा-" ...और पढ़े

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रोहित और यशस्विनी में योग के विभिन्न चक्रों और नाड़ियों के संबंध में चर्चा हो रही है।- यह तो अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारी दी थी लेकिन हम इन्हें पहचानेंगे कैसे और महसूस कैसे करेंगे?- देखिए रोहित, शरीर की हजारों नाड़ियों में से तीन नाड़ियां ही मुख्य होती हैं, जिनके बारे में आपने भी प्रश्न पूछा है इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना।- तो इन तीनों की उपस्थिति शरीर में कहां रहती है? - इड़ा नाड़ी को चंद्र नाड़ी भी कहते हैं।यह शीतलता और चित्त को अंतर्मुखी करने वाली है।इसका उद्गम मूलाधार चक्र माना जाता है और मेरुदंड के निचले भाग ...और पढ़े

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उधर वही हाल रोहित का था…. मैं योग साधना के मार्ग में यशस्विनी जी से जो सहायता मैं ले हूं…. कहीं मुझे उनसे आसक्ति न हो जाए और यह आसक्ति कहीं प्रेम में न बदल जाए और कहीं हम दोनों ईश्वरीय प्रेम को भूल कर एक दूसरे के साथ सांसारिक प्रेम के बंधन में तो नहीं बंध जाएंगे? रोहित बिस्तर पर लेटे-लेटे देर तक अपने फोन में विभिन्न अवसरों पर खींची गई यशस्विनी की फोटो देखने लगे...ये कैसा गहरा आकर्षण है यशस्विनी जी के मुख मंडल पर... कहीं वे भी ईश्वर का अंश तो नहीं? कितनी पवित्र ...और पढ़े

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लघु उपन्यास यशस्विनी: अध्याय 15: भारत की प्राचीन विद्या कलरीपायट्टू और मीरा ने प्राप्त किया आत्मरक्षा का प्रशिक्षण बदमाशों की जा रही छेड़छाड़ का समाचार जानकर यशस्विनी का मन व्यथित हो उठा। उसने विशेष रूप से मार्शल आर्ट कलरीपायट्टू के एक योग्य शिक्षक माधवन को त्रिवेंद्रम से बुलवाया। योग शिविर के आठवें दिन से प्रत्येक शाम को कलरीपायट्टू का प्रशिक्षण शुरू हुआ और इसके समापन के बाद योग शिविर का प्रश्नोत्तर सत्र शुरू होता था। मीरा ने आत्मरक्षा के प्रत्येक गुर को बड़ी बारीकी से सीखा। माधवन कलरीपायट्टु ...और पढ़े

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लघु उपन्यास यशस्विनी: अध्याय 16: हर अन्याय काकर प्रतिरोध, अबला नहीं तू सबला है अपने संदेश में यशस्विनी साधकों से कहा कि वे केवल योग साधक नहीं हैं। आवश्यकता होने पर उन्हें समाज की सेवा के लिए सार्वजनिक सेवा और सार्वजनिक क्षेत्र में भी उतरना होगा और लोगों की सहायता भी करनी होगी। योग, प्राणायाम, ध्यान ये सब केवल वैयक्तिक साधना तक ही सीमित नहीं होने चाहिए। इनका सही उपयोग जनता जनार्दन की सेवा में ही होना चाहिए। अपने उद्बोधन में रोहित ने साधकों से कहा कि लोग प्राचीन भारतीय विज्ञान की शिक्षा पाने वालों को ज्ञान ...और पढ़े

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लघु उपन्यास यशस्विनी: अध्याय 17 : खतरे का कुछ क्षण पहले ही पूर्वानुमानयशस्विनी ने असहज स्थिति से निपटने के बताने के क्रम में आगे कहा: -" हां अवश्य, क्यों नहीं काम आएंगे?"" उदाहरण के लिए अगर उन अपराधियों के पास पिस्टल होती और वे मुझे पिस्टल के पॉइंट पर ले लेते तो थोड़ी दूरी से निशाना लगाए जाने की स्थिति में मेरा मार्शल आर्ट क्या कर पाता?.... इसके अलावा अगर उन्होंने घात लगाकर मुझ पर हमला किया होता...पहले मैंने उन्हें दूर से भी नहीं देखा होता….. अचानक वे मेरे पीछे आकर प्रहार करते और मैं असावधान सी उनके हमले ...और पढ़े

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लघु उपन्यास यशस्विनी अध्याय 18: किताबों में रखे गुलाब और प्रेम का अंकुरण किशोरावस्था के प्रेम में केवल और भावनाएं होती हैं,जैसे हृदय किसी की बस एक मुस्कुराहट देख लेने पर सारे जहाँ की खुशियां मिल जाने की कल्पना कर लेता है।किताब के पन्ने में दबे हुए गुलाब के फूल इस तरह सहेज कर रखे जाते हैं जैसे इश्क में ताजमहल जैसी कोई बेजोड़ चीज मिल गई हो। प्रेम पत्र लिखने की कोशिश में कुछ एक प्रेमियों के द्वारा न जाने 200 पेज की कॉपियों के कितने पन्ने फाड़कर फेंक दिए जाते हैं।इनमें बस किसी में एक शब्द तो ...और पढ़े

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…. यशस्विनी का अनुमान एकदम सही निकला।ग्रेजुएशन पूरा होते-होते कैंपस सिलेक्शन में ही उस लड़के का चयन देश की अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी में वैज्ञानिक के पद पर हो गया और उसने जाने के समय भी उसी गंभीरता का परिचय दिया और फोन करना तो दूर एक बार भी उससे मिलना गंवारा नहीं समझा। इस स्थिति के लिए यशस्विनी पहले ही मानसिक रूप से तैयार थी। यशस्विनी को कुछ वर्ष पूर्व मार्च 2009 में मराठा चित्र मंदिर मुंबई में इस फिल्म के 700 सप्ताह पूरे होने पर एक विशेष शो में देखी गई फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे का एक-एक ...और पढ़े

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12 मार्च 2020 को इस देश में कोरोना से पहली मौत हुई।इस महामारी के देश में बढ़ते आंकड़ों को चिंता वाली बात तो थी ही। मार्च महीने में संक्रमित होने वाले लोगों में से अधिकांश अमेरिका,ईरान,इटली के लोम्बारडी समेत अन्य शहरों से आए थे, 99% लोग किसी संक्रमित के संपर्क में आए थे। 12 मार्च को यशस्विनी ने अपनी डायरी में लिखा विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कल कोरोना के कोविड-19 संस्करण को पैंडेमिक घोषित किया जिसके लिए मानव शरीर में पर्याप्त इम्यूनिटी नहीं है। यशस्विनी ने अपनी डायरी में आगे लिखा…. अब हमें अपने कृष्ण प्रेमालय ...और पढ़े

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यशस्विनी - 21

केंद्रीय बोर्ड की परीक्षाएं स्थगित होने की घोषणा के अगले दिन ही श्री कृष्ण प्रेमालय स्कूल में प्राचार्य की गई आकस्मिक बैठक में सभी कक्षा शिक्षकों को परिणाम तैयार करने के लिए सभी अंक सूचियां अपने साथ घर ले जाने के निर्देश दिए गए थे क्योंकि सभी को यह संभावना दिखाई दे रही थी कि स्कूल कॉलेज अचानक बंद किए जा सकते हैं। इसलिए जब जनता कर्फ्यू के बाद अचानक लॉकडाउन लगा और स्कूल बंद हुआ तो लोग घरों से ही अपना रिजल्ट संबंधी बाकी कार्य करने के लिए सुविधाजनक स्थिति में थे।विद्यालयों में बोर्ड के साथ-साथ बाकी परीक्षाएं ...और पढ़े

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यशस्विनी - 22

लघु उपन्यास यशस्विनी: अध्याय 22: कोरोना काल: क्या मुझे और मास्क मिल सकते हैं? इतिहास में संभवतः ऐसा पहली हुआ था जब कोरोना ने धर्मस्थलों के भी द्वार बंद करवा दिए।यशस्विनी विचार करने लगी कि कहीं न कहीं इस बीमारी के उद्भव और प्रसार में मानव की लापरवाही की बहुत बड़ी भूमिका है। देश की सवा अरब के लगभग आबादी घरों में कैद है।यशस्विनी ने रात में रोहित को फोन लगाया और कहा, "कैसे हो रोहित?"" मैं ठीक हूं यशस्विनी, तुम कैसी हो?"" मैं भी ठीक हूं रोहित। यह कठिन समय है। हमें कोरोनावायरस के शरीर पर पड़ने वाले ...और पढ़े

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यशस्विनी - 23

पिंटू ने पूछा ,"दीदी आपको कितने मास्क चाहिए"" मुझे सौ मास्क चाहिए….. ये लो पिंटू एडवांस पांच सौ रुपये…. हो जाएगा….."" हां दीदी बिल्कुल।""आपको मास्क चाहिए कब दीदी?"" आज शाम तक पर कल सुबह भी चलेगा।"" मिल जाएंगे दीदी, मुझे एक दिन का समय चाहिए जो आपने दे दिया है ।""हां पिंटू तुम समय ले लो …..एक दिन से अधिक लगेंगे तब भी चलेगा…."" नहीं दीदी, आपको कल इसी समय मिल जाएगा।""तो तुम इतने मास्क बनाओगे कैसे? दुकान पर तो केवल 8-10 दिख रहे हैं।""आज दिन भर और देर रात तक मैं और माँ दोनों मिलकर मास्क सिल लेंगे। ...और पढ़े

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यशस्विनी - 24

कोरोना महामारी के दौर पर लघु उपन्यास यशस्विनी: अध्याय 24 : सहमा- सहमा सा हर मंज़र अगले दिन यशस्विनी चौराहे के पास निर्धारित स्थान पर पहुंची,जहां छोटे उस्ताद पिंटू से उसकी भेंट हुई थी।पिंटू वहाँ नहीं था।उसकी चलित मास्क की दुकान भी नहीं थी।उसने आसपास के लोगों से पूछने की कोशिश की, लेकिन कोई भी दुकान वाले कुछ बता नहीं पाए। इतना ही कहा,वह लड़का कल तो आया था, लेकिन आज सुबह से नहीं दिखा है। यशस्विनी का मन कई तरह से सोचने लगा।उसे लगा,हो सकता है वह ...और पढ़े

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यशस्विनी - 25

कोरोनामहामारी के दौर पर आधारित लघु उपन्यास यशस्विनी अध्याय :25 सरकार ने लॉकडाउन में छूट की अवधि शाम बजे तक बढ़ा दी है। यशस्विनी, रोहित और अन्य स्वयंसेवकदिनभर के राहत अभियान के बाद अभी आधा घंटा पहले ही अपने-अपने घरों को लौटे हैं और अपराह्नको 3:30 बज रहे हैं….. कॉल बेल बजने पर यशस्विनी ने दरवाजा खोला। वह आश्चर्य से मुस्कुराउठी। वहां पिंटू खड़ा था और उसके हाथ में एक पैकेट था। उसने कहा, " दीदी यह रहाआपके द्वारा खरीदे गए 100 मास्कों का पैकेट….. मुझे माफ कर दो दीदी! आपको इन मास्कोंकी सप्लाई अगले दिन नहीं कर ...और पढ़े

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यशस्विनी - 26

कोरोना महामारी के दौर पर आधारित लघु उपन्यास यशस्विनी: अध्याय 26 आखिर कोरोना के साए ने यशस्विनी को भी अपनी चपेट में ले लिया। पिछले लगभग डेढ़ महीने से यशस्विनी लगातार कोविड वार्डों और क्षेत्रों के दौरे पर रहती थी और कई बार जाने-अनजाने संक्रमित लोगों के नजदीक से भी गुजरती। इसके अलावा दिनभर की भागदौड़ और थकान के कारण उसके शरीर पर भी विपरीत असर पड़ा होगा।आज दोपहर जब एंटीजन टेस्ट किया गया तो उसका परिणाम पॉजिटिव निकला।उसे स्वादहीनता और गंधहीनता जैसे लक्षण भी नहीं थे।हल्की खांसी, जुकाम और बुखार जैसे अन्य लक्षण ...और पढ़े

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यशस्विनी - 27

कोरोना महामारी के दौर पर आधारित लघु उपन्यास: यशस्विनी: अध्याय 27: समापन भागउधर यशस्विनी अपनी चेतना धीरे-धीरे खोने लगी जागरण है या स्वप्न?..... उसे लगा जैसे उसकी सांसें उखड़ रही हैं…..उसे तेज ज्वर का अनुभव हुआ …..उसे सीने में जकड़न का एहसास हुआ। लगा जैसे पूरा कमरा घूम रहा है और कमरे से बाहर बैठे रोहित की आकृति भी अब धुंधली होने लगी। वह समझ नहीं पा रही है कि क्या हो रहा है उसने रोहित को आवाज देना चाहा लेकिन मुंह से आवाज भी नहीं निकल पाई ।यशस्विनी ने ध्यान में डूबने की कोशिश की लेकिन वह ध्यान ...और पढ़े

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यशस्विनी - 28

........................रोहित एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं।उन्होंने संसार से पूरी तरह वैराग्य भाव धारण कर लिया था और गुरु से तप लिए हिमालय क्षेत्र में जाने की आज्ञा मांगी थी।कोविड 19 महामारी की खतरनाक पहली लहर के बीच रोहित 2021 के अगस्त महीने में निकल तो पड़े थे ज्ञान की खोज में लेकिन यह उनके जैसे आधुनिक विचार वाले युवक के लिए एकाएक आसान कार्य नहीं था।तार्किक मन आस्था को स्वीकार नहीं करता।वह किसी भी अलौकिक कार्य को तर्क की कसौटी पर कसना चाहता है।रोहित ने स्वामी विवेकानंद की जीवनी पढ़ी हुई है।श्री नरेंद्र भी एकाएक स्वामी विवेकानंद नहीं बन गए ...और पढ़े

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यशस्विनी - 29

रोहित ने कहा,"मैं समझ गया गुरुदेव! लेकिन जब मैंने स्वयं को आपके सुपुर्द कर दिया है तो फिर मैं आपकी आज्ञाओं का पालन क्यों न करूं?""इसलिए रोहित,कि मैं तुम्हें आत्मनिर्भर देखना चाहता हूं। मैं यह नहीं चाहता कि जीवन में कोई कार्य करने के पहले तुम निर्देश के लिए मेरी ओर देखो,बल्कि मैं यह चाहता हूं कि तुम आत्मनिर्णय लेने में सक्षम बन जाओ और अपने दायित्वों का निर्वहन आत्मविश्वासपूर्वक करो। समाज को ऐसे ही लोगों की जरूरत है।मुझे केवल एक या दो योग्य शिष्य ही चाहिए,शिष्यों का वह भीड़ तंत्र नहीं चाहिए,जो केवल चमत्कारिक उपलब्धियों ...और पढ़े

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यशस्विनी - 30

तभी कक्ष में स्वामी मुक्तानंद की आवाज गूंजी।जैसे स्वामी मुक्तानंद ने रोहित के मन की बात सुन ली हो उन्होंने कहा,"अब कुछ ही दिनों में हम उन प्रश्नों के उत्तर ढूंढने का प्रयत्न प्रारंभ करेंगे,जो तुम्हारे मन में उमड़- घुमड़ रहे हैं।" रोहित के मन में अनेक जिज्ञासाएं थीं।घायल रोहित वैद्य जी के प्रयास से कुछ ही दिनों में पूरी तरह स्वस्थ हो गए।एक दिन प्रातःकालीन ध्यान- योग अभ्यास के बाद स्वामी मुक्तानंद ने रोहित को अपने निज ध्यान कक्ष में बुलाया।इसके बाद रोहित के प्रशिक्षण का क्रम शुरू हुआ।रोहित विभिन्न ध्यानचक्रों ...और पढ़े

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यशस्विनी - 31

31: स्त्री देहतभी कक्ष में स्वामी मुक्तानंद की आवाज गूंजी।जैसे स्वामी मुक्तानंद ने रोहित के मन की बात सुन हो और उन्होंने कहा,"अब कुछ ही दिनों में हम उन प्रश्नों के उत्तर ढूंढने का प्रयत्न प्रारंभ करेंगे,जो तुम्हारे मन में उमड़- घुमड़ रहे हैं।" रोहित के मन में अनेक जिज्ञासाएं थीं।घायल रोहित वैद्य जी के प्रयास से कुछ ही दिनों में पूरी तरह स्वस्थ हो गए।एक दिन प्रातःकालीन ध्यान- योग अभ्यास के बाद स्वामी मुक्तानंद ने रोहित को अपने निज ध्यान कक्ष में बुलाया।इसके बाद रोहित के प्रशिक्षण का क्रम शुरू हुआ।रोहित ...और पढ़े

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यशस्विनी - 32

दुराचार कब तक?इस गंभीर चिंता से दुखी आचार्य सत्यव्रत ने कहा,"नारी किसी भी देश या काल की रही हो, सदा से पूजनीय है और उसे इस तरह विजय का प्रतीक या भोग्य, बंधक वस्तु की तरह सौदेबाजी में इस्तेमाल कभी नहीं होना चाहिए।" विवेक के मन में एक और घटना की गूंज अभी तक थी।भारत में ही राखी के दिन एक क्षेत्र में राखी बांधकर रात्रि में अपने भावी पति के साथ घर लौट रही एक युवती और उसकी बहन के साथ सामूहिक अनाचार की खबर। इस घटना का संदर्भ देते हुए विवेक ने आचार्य से पूछा,"आखिर नारी कब ...और पढ़े

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हम साथआश्रम के प्रवेश द्वार के पास बने आगंतुक कक्ष में विवेक के पहचान पत्र की जांच की गई। को इस आश्रम में पहुंचकर एक दिव्य शांति का अनुभव हुआ। थोड़ी देर बाद एक साधक पास आया।उसने विवेक को पूरे आश्रम क्षेत्र का भ्रमण कराया। इस आश्रम के लगभग हर क्षेत्र से पार्श्व में हिमालय पर्वत दिखाई देता है।अब शाम होने वाली है और धीरे-धीरे हिमालय के श्वेत धवल शिखर एक गहरे स्याह आवरण में परिवर्तित हो रहे हैं। हिमालय क्षेत्र की ठंडक अब धीरे-धीरे तीव्रता से महसूस हो रही है।पहाड़ों के मध्य एक स्थान पर विशाल साधना कक्ष ...और पढ़े

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विवेक और प्रज्ञाआश्रम के प्रवेश द्वार के पास बने आगंतुक कक्ष में विवेक के पहचान पत्र की जांच की विवेक को इस आश्रम में पहुंचकर एक दिव्य शांति का अनुभव हुआ। थोड़ी देर बाद एक साधक पास आया।उसने विवेक को पूरे आश्रम क्षेत्र का भ्रमण कराया। इस आश्रम के लगभग हर क्षेत्र से पार्श्व में हिमालय पर्वत दिखाई देता है।अब शाम होने वाली है और धीरे-धीरे हिमालय के श्वेत धवल शिखर एक गहरे स्याह आवरण में परिवर्तित हो रहे हैं। हिमालय क्षेत्र की ठंडक अब धीरे-धीरे तीव्रता से महसूस हो रही है।पहाड़ों के मध्य एक स्थान पर विशाल साधना ...और पढ़े

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यशस्विनी - 35

प्रज्ञा ने विवेक की बातें फोन पर सुन ली थीं।प्रज्ञा और विवेक दोनों ही आश्रम के लिए नए हैं।प्रज्ञा अपने फोन करने का उद्देश्य बताया।"विवेक जी!आज तो रात बहुत हो गई है लेकिन इस आश्रम में प्रातः 5:30 बजे सामूहिक ध्यान और योग का अभ्यास होता है।क्या आप इसमें आ सकेंगे?"प्रज्ञा ने पूछा।विवेक ने बताया,"क्यों नहीं?मैं तो स्वयं योग और ध्यान में आस्था रखता हूं। मैं इस आश्रम के लिए नया हूं और चाहूंगा कि अनेक बातें हम लोगों को यहां एक साथ सीखनी-जाननी होंगी और यहां अपने-अपने उद्देश्य को लेकर उन्हें पूरी भी करनी होगी,इसलिए हम लोगों का ...और पढ़े

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