रेत जीवन के आद्र रूप से शुष्क रूप होने का परिचय देती है। वैसे ही आज की ये कहानी किसी के जीवन के खुशहाल पहलू से उसके दर्दनाक पहलू को दिखाती है। ये वहीं कहानी है जिसमें सुख के फूल भी है और दुख की वर्षा भी.................... लगभग 900 साल पहले स्वर्ण श्रोणितपुर वीर किला शिव मंदिर का दृश्य मुख्य पुरोहित शिव मंदिर में जो अपनी भव्यता के लिए जाना जाता है महादेव शिव की आराधना कर रहे है। पुष्प बेलपत्र और दूध धतूरे से शिवलिंग का अभिषेक कर रहे है। और बाकी सब पुरोहित सामान्य जन और गुरु के अतिरिक्त साधक भी जहां उपस्थित है। सब अर्चन कर शिव से प्रार्थना कर रहे है। मुख्य पुरोहित भी मन ही मन भगवान से पूछ रहे है कि:- हे शिवजी। अगर आज भी हमे उतराधिकारी ना मिला तो सब व्यवस्था शून्य हो जाएगी। प्रभु आपके एक संकेत रूप में ही हम अपना मुख्य चुनते है। कोई भी व्यक्ति अब यहां हमें इस पीढ़ी में इस पद के योग्य नहीं मिल रहा। कृपया आप हमें मार्ग प्रशस्त करे कि वो कौन है जिसे आपने इस बार चुना है। और वो शिव मंदिर के बाहरी हिस्से में अा गए।

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वो कौन था???? - 1

रेत जीवन के आद्र रूप से शुष्क रूप होने का परिचय देती है। वैसे ही आज की ये कहानी के जीवन के खुशहाल पहलू से उसके दर्दनाक पहलू को दिखाती है। ये वहीं कहानी है जिसमें सुख के फूल भी है और दुख की वर्षा भी.................... लगभग 900 साल पहले स्वर्ण श्रोणितपुर वीर किला शिव मंदिर का दृश्य मुख्य पुरोहित शिव मंदिर में जो अपनी भव्यता के लिए जाना जाता है महादेव शिव की आराधना कर रहे है। पुष्प बेलपत्र और दूध धतूरे से शिवलिंग का अभिषेक कर रहे है। और बाकी सब पुरोहित सामान्य जन और गुरु के ...और पढ़े

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