Mera Mohalla Zindabad

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राष्ट्रवाद, प्रांतवाद, क्षेत्रवाद, जातिवाद वगैरह-वगैरह की तरह मोहल्लावाद भी हो सकता है, इसका पता मुझे गोकुल भइया उर्फ लंबू भइया से चला। लंबू भइया ने हमारे भीतर अपने मोहल्ले यानी नेहरू नगर के लिए न सिर्फ अद्भुत प्रेम जगाया बल्कि उसके लिए मर मिटने तक का भाव पैदा करने की कोशिश की। तब मैं आठवीं में पढ़ता था। लंबू भइया एक दिन अचानक हम मोहल्ले के बच्चों के लिए संकटमोचक की तरह प्रकट हुए। उस दिन नेहरू नगर और पड़ोसी मोहल्ले सुभाष नगर का क्रिकेट मैच था। हमलोगों ने सुभाष नगर को हरा दिया। तब एक विचित्र रीति प्रचलित थी।