विजय: नतीजा यह हूआ कि आपस के प्यार और सच्चाई की जगह सन्देह पैदा हो गये। दरबारियों में गिरोह बनने लगे। नतीजा तो जान लिया, अब पढ़िए पूरी कहानी!