अस्तित्व की लीला वेदान्त 2.0 द्वैत, अद्वैत, नेति-नेति और अस्तित्व की खुली संभावना अज्ञात अज्ञानी(Agyat Agyani) स्वतंत्र दार्शनिक प्रतिपादन पाठक के लिए एक निवेदन यह पुस्तक मूल शोध-पत्र ‘अस्तित्व की लीला — वेदान्त 2.0’ को आधार बनाकर पुस्तक-पाठ के प्रवाह में व्यवस्थित की गई है। इसमें मूल दृष्टि को स्पष्ट करने के लिए कुछ विवेचनात्मक विस्तार जोड़े गए हैं। जहाँ दर्शन और विज्ञान का संवाद है, वहाँ दार्शनिक प्रस्ताव को वैज्ञानिक प्रमाण से अलग रखा गया है। इस पुस्तक में प्रयुक्त ‘मैं’, ‘मेरी दृष्टि’ और ‘मेरा प्रस्ताव’ लेखक की स्वतंत्र व्याख्या को सूचित करते