(पांच महीने बी(पाँच महीने बीत चुके थे। सिमरन अब उस हवेली की चारदीवारी में कैद हो गई थी। करन का कोई पता नहीं था, न कोई फोन, न कोई संदेश। वह अंधेरे में कहीं खो गया था, जैसे धुएं में मिल जाए।)सिमरन की हालत अब बहुत नाजुक हो गई थी। बच्चे के असामान्य रूप से तेज विकास ने उसके शरीर को पूरी तरह थका दिया था। उसकी हड्डियां दर्द से टूट रही थीं, मांसपेशियों में ऐंठन रहती थी, और वह बिस्तर से उठ भी नहीं पाती थी। उसे चलने के लिए सहारे की जरूरत होती थी। उसका चेहरा पीला पड़