चला गया करण

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(कुछ दिन बीत गए थे। हवेली का माहौल अब वही नहीं रहा था जो पहले था। जहाँ कभी प्यार और हंसी गूंजती थी, अब एक अजीब सी दूरी और खामोशी छा गई थी।)(करन बेचैन था। वह हमेशा की तरह शांत नहीं था। उसकी आँखों के नीचे गहरे काले घेरे थे, और वह अक्सर खिड़की से बाहर टकटकी लगाए देखता रहता था। उसके मन में एक ही ख्याल बार-बार कौंध रहा था—*अगर सिमरन गर्भवती है, तो?**एक इंसान और एक वैंपायर का बच्चा... क्या वह इंसान होगा? या वैंपायर? या कोई ऐसा राक्षस जिससे दुनिया कभी नहीं निपट पाई?**क्या यह बच्चा सिमरन