Ep 2 अल्फाज़ ए इश्क

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ढलती हुई उस उदास शाम के साए में, कबीर और आयरा एक-दूसरे के बिल्कुल सामने खड़े थे। जिस पुरानी और जादुई डायरी ने पहले ही उनकी रूह को एक दूसरे से पूरी तरह जोड़ दिया था, आज उसी डायरी को सबसे बड़ा गवाह बनाकर दोनों ने बहुत ही भावुक होकर एक-दूसरे का हाथ थामा था। दोनों की आँखों में जुदाई के गहरे आँसू साफ़ नज़र आ रहे थे, पर उनके कांपते होठों पर एक-दूसरे से कभी भी जुदा न होने का एक बेहद पवित्र और मजबूत वादा भी था। वे आज आख़िरकार मिल तो चुके थे, लेकिन हालात की संगीन