चक्रवात

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                 1 शशि की बेहोशी जब टूटी तो उस ने अपने को सोफ़े पर पाया ।                  एक नई चेतना के साथ।                   उस के हिये में एक डिबिया थी। बारजे की चीख जिस में बंद थी। ढक्कन के ऐन नीचे। और जिसे वहीं रोके रखने का डाट उसे अपने पास गुप्त रखना था।                  “तुम्हें बता रहा हूं,” शशि की भनक पाते ही बिस्तर पर लेटे रहे जगन ने कहा, “फिर