वृषाली - अध्याय 1

वृषाली अध्याय – 1 अंगराज या राधेय? मेरे प्रिय वाचक मेरी ये स्टोरी गुजराती भाषा मेंबहुत  धुम मचा रही है तो मैने सोचा क्यों ना इसे हिन्दी भाषा में पेश किया जाए तो ज्यादा से ज्यादा वाचक इसका आनंद उठा सके आपको ये स्टोरी कैसी लगी जरूर बताना संध्या धीरे-धीरे ढल रही थी। आकाश की अंतिम किरणें मानो दिन को विदा दे रही थीं, किंतु राधामाता के हृदय में चिंता का अंधकार गहराता जा रहा था।तुलसी के चौरे पर दीप प्रज्वलित करने का समय हो चुका था। उनके हाथों में दीपक था, बाती भी तैयार थी, फिर भी उनका मन