[64]“सरिता जी, संसार की तीन अवस्थाएं हैं, उत्पत्ति – स्थिति – प्रलय। इन तीनों अवस्थाओं से संसार चक्र चलता रहता है। संसार के चलने के लिए हम जन्म लेते हैं, शरीर धारण करके शरीर के माध्यम से कर्म करते हैं, सुख दु:ख का अनुभव करते हैं, समय आने पर उसी शरीर को त्याग कर चले जाते हैं। प्रत्येक पुरुष को अर्थात आत्मा को किसी न किसी विशेष कार्य के लिए जन्म लेना पड़ता है। मेरे इस शरीर का भी कोई विशेष कार्य हेतु प्रयोजन होगा। आपके शरीर का भी ऐसा ही कोई विशेष प्रयोजन होगा। सभी का कोई न कोई