'धड़ाम!'लोहे के विशाल भारी कपाट गिरने की गूंज उस संकरी, नम सुरंग में गूंज उठी। सीलन, सड़ी हुई काई और जंग की तीखी गंध हवा में इतनी गाढ़ी थी कि हर सांस के साथ सीने में जलन हो रही थी।सामने वो विशाल लोहे की जाली थी, जिस पर ब्रिटिश हुकूमत के दौर के पांच मोटे जंग खाए ताले लटके थे। और पीछे... पीछे सिर्फ घुप अंधेरा था, जिसे चीरती हुई तीन भारी टॉर्चों की पीली रोशनी धीरे-धीरे उनकी तरफ बढ़ रही थी। साथ ही भारी बूटों की थाप पत्थरों पर टकरा रही थी—'ठक... ठक... ठक...'"आदित्य..." सिया ने दीवार से अपनी