यह वृतांत बीसवीं सदी के साठवें और आठवें दशकों के बीच की एक बीती है। “आप पिता- पुत्र आज मिठाई बांटो। कुंती मिल गई है,” पत्नी ने मेरे घर लौटते ही मेरे आगे एक पोस्टकार्ड आन लहराया। ‘पीपल ड्योढ़ी, गल्ला मंडी, कस्बापुर’ से आए उस कार्ड पर लिखा मेरा पता बाबूजी के हाथ का था, और मूल शब्द मेवालाल के : ‘कुंती आप लोग से मिलना चाहती है। बीमार है।’