ध्रुव की ताराभाग - ३१लेखिका "अनामिका"कमरे में बजती शहनाई और बाहर मेहमानों की चहल-पहल के बीच आखिरकार वो दिन आ ही गया। इतने महीनों की भागदौड़, थका देने वाली शॉपिंग और रिश्तेदारों की किचकिच के बाद आज ध्रुव और तारा की शादी का दिन था।एक तरफ ध्रुव शीशे के सामने खड़ा अपनी शेरवानी की कॉलर ठीक कर रहा था। सिर पर बंधी पगड़ी और इस लिबास में वह सच में किसी रियासत के राजकुमार जैसा लग रहा था। दोस्तों की तंजभरी बातें और गले में चुभती एम्ब्रॉयडरी के बीच उसका ध्यान बार-बार घड़ी पर जा रहा था। हफ्तों की थकान