(कमरे में अब सन्नाटा है, बस करन की भारी साँसों की आवाज़ गूँज रही है। सिमरन का चेहरा अब डर से मुक्त हो चुका है, उसमें एक दृढ़ संकल्प और अपार प्रेम झलक रहा है।)सिमरन (धीरे से, बहुत ही कोमलता से) बोली - शांत हो जाओ मेरे राजा… अब सब ठीक है।(वो करन के बिखरे हुए बालों को पीछे करते हुए, उसके माथे पर एक हल्का सा चूमती है। फिर उसके गालों पर, और अंत में उसके ठंडे होंठों पर एक पवित्र, कांपता हुआ चुंबन देती है। यह चुंबन किसी वासना का नहीं, बल्कि एक 'औषधि' जैसा था—जो उसके अंदर के