बिजली की चमक हवेली की पुरानी दीवारों पर पड़ती है।दरवाज़ा ज़ोर से खुलता है — करन अपनी बाँहों में सिमरन को लिए अंदर आता है। दोनों पूरी तरह भीगे हुए हैं। सिमरन के कपड़ों पर खून के हल्के निशान हैं।)करन (थकी आवाज़ में) बोला - अब कोई तुम्हे छू नहीं सकेगा…अब तुम सुरक्षित हो…(वो सिमरन को धीरे से पलंग पर लिटाता है। सिमरन काँपते हुए उसकी ओर देखती है। उसकी आँखों में डर नहीं, सिर्फ़ करन के लिए चिंता है।)सिमरन (धीरे से) बोली - करन… आप ठीक हो ना?करन (साँस लेते हुए) बोला - ठीक… (रुककर) बोला - शायद नहीं।कभी-कभी लगता है मेरे अंदर दो