(कमरे में हल्की रौशनी जल रही है। सिमरन खिड़की के पास बैठी है, उसकी आँखों से आँसू टपक रहे हैं। बाहर बारिश की हल्की बूँदें गिर रही हैं। हवा में दर्द और सन्नाटा घुला हुआ है।)(तभी दरवाज़ा धीरे से खुलता है। अंदर से करन आता है। उसके हाथ में उसका टेडी बियर है। उसकी आँखों में चिंता और मासूमियत है।)करन (धीरे से, काँपती आवाज़ में)बोला – परी… तुम रो क्यों रही हो?(सिमरन अपने आँसू पोंछती है, मुस्कुराने की कोशिश करती है।)सिमरन (धीरे से) बोली —कुछ नहीं करन… बस… आँखों में धूल चली गई थी।(करन उसका चेहरा पकड़कर ऊपर उठाता है। उसकी