धड़कने दिल की - 8

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कैमरे के शटर की हल्की सी 'क्लिक' आवाज ने उस दोपहर के सन्नाटे को एक मीठे सुकून से भर दिया। बरगद के पत्तों से छनकर आती गुनगुनी धूप सिया के चेहरे पर नाच रही थी। उसकी भूरी आंखें, चांदी के नन्हें झुमके और चेहरे पर खिली वो पहली सच्ची मुस्कान अब हमेशा के लिए उस पुरानी एनालॉग रील में कैद हो चुकी थी।आदित्य ने लेंस से आंखें हटाईं। सामने बैठी सिया अपनी खुली डायरी के पन्नों को हवा के झोंकों से बचाने के लिए उस पर अपनी नफीस हथेली रखे हुए थी। तीन महीने का वो खौफनाक दौर—आईसीयू की ठंडी