धड़कने दिल की - 7

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'धांय!'गोली की गूंज वेयरहाउस की हर लोहे की चादर से टकराकर एक भयानक सन्नाटे में बदल गई। बारूद की तीखी, कड़वी गंध हवा में फैल गई।सिया का शरीर धक्के के कारण गीली कंक्रीट की जमीन पर जा गिरा था। उसका सिर एक खाली लोहे के ड्रम से टकराया, जिससे कुछ पलों के लिए उसकी आंखों के आगे अंधेरा छा गया। लेकिन जैसे ही उसने नजरें ऊपर उठाईं, उसके हलक से एक ऐसी दिल दहला देने वाली चीख निकली जिसने पुलिस के लाउडस्पीकरों के शोर को भी दबा दिया।"आदित्य!"आदित्य वहीं खड़ा था। उसकी आंखें चौड़ी थीं, पुतलियां जैसे किसी शून्य में