बेतहाशा

  • 603
  • 180

​अध्याय 1: सन्नाटे की आवाज़ और 'दौलत हाउस' का दरवाज़ा​दिसंबर की सर्द और मखमली धूप जब पुरानी दिल्ली की तंग गलियों से छनकर बची-ची बची-खुची पुरानी हवेलियों पर पड़ती है, तो ऐसा लगता है मानो वक्त खुद सुस्ताने के लिए बैठ गया हो। हवा में अलाव के धुएँ की महक, सूखी पत्तियों की सरसराहट और पुरानी किताबों के पन्नों की वह सौंधी गंध घुली हुई थी जो सिर्फ इतिहास के पन्नों में मिलती है।​अद्वैत ने अपनी पुरानी बुलेट बाइक को एक विशाल, जर्जर हो चुके लोहे के गेट के सामने लाकर रोका। गेट पर लगी जंग की मोटी परतें हवा