काले, बदबूदार बोरे के भीतर सांस लेना किसी जलते हुए तवे पर फेफड़े रखने जैसा था। गाड़ी के झटकों से आदित्य का सिर बार-बार एसयूवी के लोहे के फर्श से टकरा रहा था। मुंह में खून का नमकीन स्वाद था और घुटने की चोट से रिसता दर्द हर धड़कन के साथ दिमाग की नसों को फाड़ रहा था।गाड़ी अचानक एक तेज झटके के साथ रुकी। बाहर समंदर की सड़ी हुई काई, कीचड़ और खारे पानी की तीखी गंध हवा में तैर रही थी। यह माहिम क्रीक का वही इलाका था, जहां शहर का कचरा और इंसानों के गुनाह एक साथ