अध्याय 11 : लाल साड़ी का सच"मालिक! बचाओ! आराध्या बिटिया को कोई खिड़की से खींच रहा है!"दादी अम्मा की चीख सुनकर रुद्र और नित्या दूसरे कमरे में भागे।कमरा अंदर से बंद था।रुद्र ने दरवाजा तोड़ा - धड़ाम!अंदर का नजारा देखकर दोनों के होश उड़ गए।आराध्या खिड़की पर लटकी हुई थी। उसका आधा शरीर बाहर था। और खिड़की के बाहर... एक लाल साड़ी का पल्लू लहरा रहा था, जैसे कोई उसे खींच रहा हो।"दीदी!" नित्या भागी और आराध्या के पैर पकड़ लिए।रुद्र ने खिड़की से बाहर देखा। बाहर कोई नहीं था। सिर्फ अंधेरा और बगीचा। पर लाल साड़ी का पल्लू हवा