अध्याय 2 : हवेली में कैद जंगली बिल्ली"तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी स्कूटी को हाथ लगाने की!"नित्या चीख रही थी, पर उसकी आवाज जी-वैगन के अंदर गूँज कर रह गई थी।रुद्र ने उसे लगभग उठाकर अपनी जी-वैगन में पटक दिया था। बाहर उसकी गुलाबी स्कूटी धू-धू कर जल रही थी।"मेरी स्कूटी! तुम पागल हो क्या? वो मेरे पापा ने मुझे दी थी!" नित्या की आँखों में आँसू आ गए।रुद्र एकटक उसे देख रहा था। उसकी आँखों में गुस्सा नहीं था, एक अजीब सा जुनून था।उसने जेब से रुमाल निकाला और नित्या के गाल पर जो कालिख लगी थी, उसे पोंछने