ध्रुव की तारा - भाग 29

ध्रुव की ताराभाग - २९ लेखिका "अनामिका" ​ध्रुव ने बिना किसी दिखावे के बेहद सादगी से अपने दिल का हाल कह दिया था। उसकी निगाहें टकटकी लगाए तारा के चेहरे पर टिकी थीं, मानो वह हर गुज़रते सेकंड के साथ उसकी आँखों में अपना जवाब ढूँढ रहा हो।​तारा जहाँ की तहाँ सुन्न खड़ी रह गई। इतने बरसों से जिस एक पल का सपना उसने हर दिन, हर रात देखा था... जब वह हकीकत बनकर उसके ठीक सामने आया, तो उसके दिल का बाँध टूट गया। वह खुशी, राहत और इतने सालों के इंतज़ार का भारीपन एक साथ संभाल नहीं पाई। इससे पहले