कुण्डिकोपनिषद--कुण्डिकोपनिषद् सामवेद की संन्यास-उपनिषदों में गिनी जाती है और इसमें 28 मन्त्र/श्लोक हैं। इसका मुख्य विषय संन्यास-विधि, वैराग्य, आत्मचिन्तन और आत्मा के अद्वैत स्वरूप का निरूपण है। ॥ कुण्डिकोपनिषत् ॥मंगलाचरणकुण्डिकोपनिषत्ख्यातपरिव्राजकसंततिः ।यत्र विश्रान्तिमगमत्तद्रामपदमाश्रये ॥अर्थ:कुण्डिकोपनिषद् जिस परिव्राजक-संन्यास परम्परा को प्रकाशित करती है, उस ज्ञान-मार्ग में जहाँ परम विश्रान्ति प्राप्त होती है, मैं उस परम रामपद का आश्रय लेता हूँ। ॥ शान्तिपाठ ॥ॐ आप्यायन्तु ममाङ्गानि वाक्प्राणश्चक्षुःश्रोत्रमथो बलमिन्द्रियाणि च ॥सर्वाणि सर्वं ब्रह्मोपनिषदं माहं ब्रह्म निराकुर्यांमा मा ब्रह्म निराकरोदनिराकरणमस्त्वनिराकरणंमेऽस्तु तदात्मनि निरते य उपनिषत्सु धर्मास्ते मयिसन्तु ते मयि सन्तु ॥ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥अर्थ:मेरे अंग, वाणी, प्राण, नेत्र, कान, बल और सभी इन्द्रियाँ पुष्ट हों। यह सम्पूर्ण उपनिषद्-बोध