‘‘हे भगवान इसको भी अभी टूटना था’’ - हाथ से पुराना शिशा गिरने पर जग्गू बड़बड़ाया। टेबल पर रखा शिशा उसके हाथ लगने से नीचे गिरकर चकनाचूर हो गया। ‘‘पता नहीं मेरे ही साथ ऐसा क्यों होता है’’ दुखीः मन से जग्गू ने लम्बी सांस भरी। कानपुर जैसे बड़े शहर में रहने वाले जगरूप सिंह उर्फ जग्गू जी पेशे से एक विख़्यात जासूस है (ऐसा ये समझते हैं, पर जब भी ये कुछ करने जाते हैं अर्थ का अनर्थ हो जाता है)। इनका नाम सुनकर एक तगड़े रौबदार व्यक्त्वि का आभास होता है परन्तु वास्तव में ये हैं उसका ठीक