राधा का ब्याह हुए पाँच दिन हो गए। उसके बाद वह मायके का फेरा लगाकर आज सुबह ससुराल चली गई। सारे मेहमान और नाते रिश्तेदार भी लौट गए। घर अचानक खाली सा लगने लगा। लेकिन कुसुम को इसी खालीपन का इंतजार था। वह राधा की कही बात पर अकेले में सोच-विचार करना चाह रही थी। वैसे सोचना भी क्या है , और सच तो यह है कि सोचकर होना भी क्या है ! हाँ एक बात है कि साल भर वह जिस बात को सच समझ रही थी वह आद्योपांत झूठ निकली। राधा ना बताती तो कुसुम और राधा के