ध्रुव की ताराभाग - २८लेखिका अनामिका ध्रुव का मैसेज पढ़ते ही तारा के दिल की धड़कनें अचानक तेज़ हो गईं। उसने अपने घबराते हुए हाथों से फ़ोन जेब में रखा और किसी तरह चेहरे पर सामान्य भाव लाते हुए बोली, अंकल-आंटी, मेरी एक सहेली की तबीयत थोड़ी ठीक नहीं लग रही, मैं बस पाँच मिनट में उससे मिलकर वापस आती हूँ। बिना किसी को संभलने का मौका दिए, वह ध्रुव के घर से बाहर निकल गई।उसके जाते ही विजय और सुमन चेहरे पर हल्की सी मुस्कान दबाए एक-दूसरे को देखने लगे। तभी सुधा से अब और सब्र न हुआ, उसने बेसब्री