आत्मोपनिषद

आत्मोपनिषद--आत्मोपनिषद् का सम्बन्ध अथर्ववेद से माना जाता है।आत्मोपनिषद का मुख्य विषय: आत्मा का स्वरूप, आत्मज्ञान, ब्रह्मज्ञान और मुक्तिमुख्य शिक्षा: मनुष्य का वास्तविक स्वरूप शरीर नहीं, बल्कि आत्मा है; आत्मा और ब्रह्म की एकता का ज्ञान ही परम ज्ञान है। इसमें 31 मंत्र हैं।मन्त्र १आत्मसंज्ञः शिवः शुद्ध एक एवाद्वयः सदा ।ब्रह्मरूपतया ब्रह्म केवलं प्रतिभासते ॥ १॥हिन्दी अर्थ—आत्मा नाम से प्रसिद्ध वह शिवस्वरूप, परम कल्याणकारी और पूर्णतः शुद्ध है। वह सदा एक और अद्वैत है, अर्थात् उसके अतिरिक्त कोई दूसरा परम सत्य नहीं है। अपने वास्तविक ब्रह्मस्वरूप में वह केवल ब्रह्म ही ब्रह्म के रूप में प्रकाशित होता है।सरल भावार्थ—मनुष्य का वास्तविक स्वरूप