ज्ञान नहीं, दिशा यात्रा ही बोध है

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वेदान्त 2.0 — ज्ञान नहीं, दिशा; यात्रा ही बोध हैलेखक: अज्ञात अज्ञानी (Agyat Agyani)1. ज्ञान दिया नहीं जाता, ज्ञान की दिशा दिखाई जाती हैदुनिया तुम्हें बिना परिवर्तन हुए ज्ञान दे दे, तो वह ज्ञान तुम्हारे भीतर परिवर्तन कैसे लाएगा?ज्ञान केवल शब्दों का संग्रह नहीं है। शब्द तुम्हें किसी दिशा का संकेत दे सकते हैं, लेकिन उस दिशा में चलने का अनुभव तुम्हें स्वयं प्राप्त करना होगा।ज्ञान का संकेत दिया जा सकता है, लेकिन बोध की यात्रा स्वयं करनी पड़ती है।मार्ग बताने वाला तुम्हें दिशा दे सकता है, पर उस दिशा में चलने का अनुभव तुम्हारी जगह कोई दूसरा नहीं कर