शहर के किनारे एक पुराना, वीरान इलाका था, जहाँ सूरज ढलते ही सन्नाटा अपनी चादर बिछा देता था। इसी इलाके में अंकित नाम का एक नौजवान अकेला रहता था। अंकित को पुरानी, नायाब और भूली-बिसरी चीज़ों को जमा करने का जुनून था। उसे लगता था कि हर पुरानी चीज़ के पीछे कोई न कोई अनसुनी कहानी छिपी होती है।एक दिन, जब वह शहर के सबसे पुराने कबाड़ बाज़ार की धूल भरी गलियों से गुज़र रहा था, तब उसकी नज़र एक अजीब सी दुकान पर पड़ी। दुकान के अंधेरे कोने में एक बहुत ही पुरानी दीवार घड़ी रखी थी। उस घड़ी