धड़कने दिल की - 3

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लाइब्रेरी के सबसे अंधेरे कोने में हवा जैसे बर्फ बन चुकी थी। आर्काइव सेक्शन की ऊंची, महोगनी की पुरानी अलमारियों के बीच सिर्फ दो इंसानों की तेज चलती सांसों की आवाज सुनाई दे रही थी।आदित्य की उंगलियां खुली हुई डायरी के पन्नों पर ही जम चुकी थीं। ताला टेबल पर एक तरफ खुला पड़ा था और नन्हीं पीतल की चाबी धूप की एक पतली सी लकीर में चमक रही थी।"तुम... तुम मेरी डायरी के साथ क्या कर रहे हो?!"सिया के लफ्ज लाइब्रेरी की खामोशी को चीरते हुए निकले। उसकी आवाज में सिर्फ गुस्सा नहीं था; उसमें एक ऐसा भयानक खौफ