पाशुपतोपनिषद

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पाशुपतोपनिषद--यह उपनिषद अथर्ववेद से सम्बद्ध माना जाता है।यह मुख्यतः भगवान शिव के पाशुपत स्वरूप, शिव-तत्त्व और साधना से संबंधित है।पाशुपतब्रह्मोपनिषद् में ४६ मंत्र/श्लोक क्रमांकित हैं, और इसके बाद शान्तिपाठ तथा उपनिषद्-समाप्ति आती है।॥ १ ॥मूल पाठ—हंसात्ममालिकावर्णब्रह्मकालप्रचोदिता ।परमात्मा पुमानिति ब्रह्मसंपत्तिकारिणी ॥ १॥ हिन्दी अर्थ—हंसस्वरूप आत्मा की माला के रूप में जो वर्णमयी शक्ति है, वह ब्रह्म और काल को प्रेरित करने वाली है। वही साधक को यह बोध कराती है कि परमात्मा ही पुरुष है और यही ज्ञान ब्रह्म की प्राप्ति कराने वाला है।॥ २ ॥मूल पाठ—अध्यात्मब्रह्मकल्पस्याकृतिः कीदृशी कथा ।ब्रह्मज्ञानप्रभासन्ध्याकालो गच्छति धीमताम् ।हंसाख्यो देवमात्माख्यमात्मतत्त्वप्रजा कथम् ॥ २॥ हिन्दी अर्थ—अध्यात्म-ब्रह्म की वास्तविक आकृति और उसका