सुनील उस शाम ऑफिस की खिड़की के पास बैठा अपनी फाइलें देख रहा था। ऑफिस में रोज की तरह लोग अपने काम में लगे हुए थे, लेकिन पिछले कई दिनों से एक चीज उसे लगातार परेशान कर रही थी। उसका दोस्त रमेश ऑफिस नहीं आ रहा था। पहले सुनील ने सोचा था कि शायद रमेश बीमार होगा, लेकिन जब पांच दिन बीत गए और उसकी कोई खबर नहीं मिली तो उसे चिंता होने लगी। रमेश ऐसा आदमी नहीं था जो बिना बताए इतने दिनों तक गायब रहे।शाम करीब छह बजे ऑफिस का काम खत्म होने लगा। सुनील अपनी फाइल बंद