दोस्त का पत्र

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दोस्त का पत्र:जब पहली बार नैनीताल पहुँचा तो तब नैनी झील प्रसन्न थी,लबालब भरी। भीड़भाड़ कम थी। वातावरण को मनुष्य अनुशासित न रहे तो प्रदुषित करता है। सौन्दर्य भी गढ़ता है, यदि सृष्टा हो। पहले दिन बारिश हो रही थी। सभी दिशायें खुली थीं। दाँत दर्द ने चुनौती पेश कर दी थी। अतः सबसे पहले बी. डी. पाण्डे अस्पताल में दाँत निकलवाने डाक्टर के पास गया। तब एमबीबीएस डाक्टर ही दाँत निकाल देते थे,पाँच रुपये में। तब जीवन अधिक स्वभाविक था। तनाव दूर-दूर तक नहीं था। कक्षा में एक लड़का पत्र लिख कर लाया था-"तुम्हें मैं प्रतिदिन अपने छात्रावास आते-जाते