वैचारिकी :- धार्मिकता,लेखक और हिप्पोक्रेट बुद्धिजीवी --------------------------------------- एक लेखक ,विचारक की धार्मिक दृष्टि भी होती ही है।भले ही बाद में चार अक्षर पढ़कर या स्वार्थवश वह बाहर से नास्तिक हो जाए । मुझे याद है वाराणसी में ,करीब डेढ़ दशक पूर्व, सेवक स्मृति सम्मान लेने गया था। सोच विचार पत्रिका वाले मिश्र बंधु (प्रोफेसर जितेंद्रनाथ मिश्र,नरेंद्र नाथ मिश्र) ने बुलाया था। तब काशीनाथ जी के द्वारा श्रेष्ठ कथाकार सम्मान,वाराणसी की पावन धरा पर मिला था। अभी मोदी जी के वाराणसी में आने की दूर दूर तक आहट तो छोड़ो ,दिल्ली आने की भी खबर नहीं थी। वह