कहानी - भाग्यसोहन एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर था। उसकी पत्नी सुधा, पढ़ी-लिखी, समझदार और सुलझे विचारों वाली महिला थी। शादी के बाद जब बेटा हुआ, तो सुधा ने एक बड़ा फैसला लिया। उसने कहा, "सोहन, अभी बच्चे को मेरी सबसे ज्यादा जरूरत है। नौकरी तो बाद में भी मिल जाएगी, पर उसके बचपन के ये साल लौटकर नहीं आएंगे।"सोहन मान गया। सुधा ने पूरी तरह खुद को घर को समर्पित कर दिया। सवेरे से रात तक वही रसोई, वही होमवर्क, वही बच्चे के साथ खेलना, कहानियां सुनाना। धीरे-धीरे उसने आईने में देखना बंद कर दिया। खुद पर ध्यान