ध्रुव की तारा - भाग 20

  • 672
  • 1
  • 216

ध्रुव की ताराभाग - २०लेखिका "अनामिका"​ध्रुव की आँखें तारा पर ही टिकी थीं। उसके चेहरे पर नाराजगी और सवालों का गुबार साफ दिख रहा था। उसने बिना पलक झपकाए पूछा, "किसी को याद नहीं होगा... मतलब? तारा, साफ़-साफ़ बताओ कि तुम यहाँ अचानक बिना बताए क्यों आई? और यह पेस्ट्री... क्या चल रहा है यह सब?"​तारा ने हल्के से ध्रुव का हाथ छुआ और शांत आवाज़ में कहा, "अरे ध्रुव, पहले थोड़ा शांत तो हो जाओ! मैं यहाँ परसों मम्मी-पापा की मैरिज एनिवर्सरी है न, उसी के केक का ऑर्डर देने आई थी। जब काउंटर पर तुम्हारी फेवरेट पेस्ट्री दिखी,