बाबूजी की विपरीत सीख

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               जीजी की शादी के बाद जीजी से ज़्यादा बदलाव बाबूजी में आया।                कहां तो वह जीजी के प्रति की गई पुंजातीय वर्ग की छोटी से छोटी हिमाकत की भनक पाते ही जीजी को महिला वर्ग के समानाधिकारों का हवाला दे कर उन्हें आक्रामक व स्वाग्रही बनने की सीख दिया करते थे और कहां अब वह जीजी को जीजा के बड़े- से- बड़े दोष को भी अनदेखा करने की विपरीत सीख देने लगे : भारतवर्ष में किसी भी पत्नी को बराबरी का दर्जा पाने की इच्छा रखनी