महबूब की वह हसीन रात

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लखनऊ की सर्दियों की रात थी। दिसंबर का महीना, घड़ी में रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे और हजरतगंज की गलियां कोहरे से ढकी हुई थीं।‎‎आरव अपनी पुरानी स्कूटी पर बैठा इंतजार कर रहा था। हाथ में एक छोटा सा गुलाब था जो अब ठंड से मुरझाने लगा था। आज से ठीक तीन साल पहले इसी जगह, इसी बेंच पर उसने नायरा को पहली बार देखा था।‎‎नायरा दिल्ली से लखनऊ आई थी, अपनी नानी के घर। एम.ए. में उर्दू की स्टूडेंट, शायरी पसंद करने वाली लड़की। और आरव, लखनऊ यूनिवर्सिटी में फोटोग्राफी का छात्र।‎‎"तुम रोज़ यहाँ बैठकर किसकी फोटो