अलमारी

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सुबह के साढ़े सात बजे थे। रीना ने अदरक वाली चाय बनाकर रवि को थमाई और बहुत हिम्मत जुटाकर बोली, "सुनो, मुझे एक छोटी सी अलमारी चाहिए। मेरा कॉस्मेटिक का सामान, क्रीम-पाउडर, पर्स सब बेड पर इधर-उधर बिखरे रहते हैं। एक छोटी सी दराज वाली अलमारी आ जाएगी तो सब संभल जाएगा।"रवि ने अखबार से नजर हटाए बिना ही जवाब दिया, "कोई अलमारी-वलमारी नहीं आएगी। पैसे क्या पेड़ पर उग रहे हैं? तुम तो बस खर्चा करना जानती हो, पैसा कमाने की तो कभी सोचती नहीं। जैसा चल रहा है, वैसा चलने दो।"कहकर वह जूते पहनकर ऑफिस चला गया। दरवाजे