हुक्म और हसरत -34

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️ हुक्म और हसरत ️#Arsiaएपिसोड 34 — सिर्फ हमारे लिए शाम का समय था।रायगढ़ कार्यालय का काम लगभग खत्म हो चुका था।एक-एक करके कर्मचारी अपने घर जाने लगे थे।काव्या आखिरी कुछ फाइलें समेट रही थी।सिया अपनी मेज़ पर बैठी सामने रखे दस्तावेज़ देख रही थी।लेकिन पिछले दस मिनट से उसने एक भी पन्ना नहीं पलटा था।काव्या ने उसे ध्यान से देखा।“क्या हुआ?”सिया ने तुरंत सिर उठाया।“कुछ नहीं।”“आप दस मिनट से उसी पन्ने को देख रही हैं।”सिया ने नीचे देखा।वही पन्ना।वह थोड़ा झेंप गई।“मैं सोच रही थी।”काव्या ने मुस्कुराकर पूछा—“किसके बारे में?”“काम के बारे में।”“अच्छा?”“हाँ।”काव्या ने उसकी तरफ देखा।“पक्का?”सिया ने आँखें