हुक्म और हसरत -27

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हुक्म और हसरत एपिसोड 27 #Arsia"अब आगे…”«"अगर सिया को बचाना है... तो अकेले पुराने मंदिर तक आइए।"»अर्जुन की आँखें फोन की स्क्रीन पर टिकी थीं।उसके चेहरे पर कोई घबराहट नहीं थी।बस एक अजीब-सी शांति थी...वही शांति जो उसके अंदर तूफ़ान आने से पहले उतरती थी। विवेक ने बेचैनी से पूछा—"क्या लिखा है?"अर्जुन ने फोन उसकी तरफ़ बढ़ा दिया।विवेक ने मैसेज पढ़ा और तुरंत बोला—"ये साफ़ तौर पर जाल है।"अर्जुन ने उसकी तरफ़ देखा।"मुझे पता है।""फिर आप वहाँ अकेले जाने की सोच भी कैसे सकते हैं?"अर्जुन ने कोई जवाब नहीं दिया।उसकी नज़र सिया पर गई।सिया बिस्तर पर बैठी थी।उसके चेहरे पर