(रात का समय।कमरे में हल्की नीली रोशनी फैली हुई है। खिड़की से आती हवा सीया के बालों को उड़ाती है। कबीर टेबल पर बैठा कुछ फाइलें देख रहा है, पर उसकी निगाहें बार-बार सीया की ओर जा रही हैं।)(सीया धीरे से उठती है, उसके कदम बहुत नर्म हैं। वो कबीर के पीछे जाकर उसके कंधे पर हाथ रखती है। कबीर थोड़ा चौंकता है, पर कुछ नहीं कहता। वो उसकी ओर देखता है — दोनों की नज़रें मिलती हैं।)सीया (धीरे, मुस्कुराते हुए) बोली - “कबीर जी… क्या मैं सच में इतनी अजनबी हूँ आपके लिए?”(कबीर कुछ बोलने की कोशिश करता है, पर