(घड़ी में रात के 2 बजे हैं। कमरा अंधेरे में डूबा हुआ है। कबीर गहरी नींद में सो रहा है। सीया उसकी तरफ देखती है — उसके चेहरे पर थकान है, पर एक रहस्य भी।)(सीया धीरे-धीरे उठती है। कमरे की हल्की नीली लाइट उसके चेहरे पर पड़ती है। वो नंगे पाँव चलती है ताकि कोई आवाज़ न हो।उसकी निगाहें सीधी उस अलमारी की तरफ हैं जहाँ कबीर अक्सर फाइलें छुपाकर रखता है।)सीया (धीरे से खुद से) बोली - “आज देखती हूँ कबीर जी...आप आखिर मुझसे क्या छिपा रहे हो…।”(वो अलमारी खोलती है।अंदर बहुत सारी फाइलें हैं — “Research Log”, “Code Analysis”,