नीले रंग की स्क्रीन और उस पर उभरते शब्दों की दुनिया में मयूर के लिए सिर्फ एक नाम गूंजता था—अनामिका।मातृभारती ऐप पर मयूर हर रोज़ अपनी छोटी-बड़ी कविताएं और कहानियां पोस्ट करता था, लेकिन उसका ध्यान कभी 'लाइक्स' की संख्या पर नहीं जाता था। उसकी नज़रें सिर्फ नोटिफिकेशन के उस छोटे से घेरे को तलाशती थीं, जहां अनामिका की कोई नई प्रतिक्रिया दर्ज हो सके।अनामिका की कहानियां अलग थीं। उनमें उदासी की एक पतली सी लकीर होती थी, जिसे केवल वही महसूस कर सकता था जो खुद तन्हाइयों से वाकिफ हो। मयूर ने उसकी हर पंक्ति को घोलकर पी लिया