ध्रुव की तारा - भाग 16

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ध्रुव की ताराभाग - १६लेखिका "अनामिका"​ध्रुव के वापस आने की खुशी में दोनों परिवारों ने मिलकर एक छोटी सी गेट-टुगेदर पार्टी रखी। बाहर से तरह-तरह का स्वादिष्ट खाना मंगवाया गया था। सब लोग ड्राइंग रूम में बैठकर बातें कर रहे थे, हँस-बोल रहे थे और बीच-बीच में ध्रुव और तारा की नोक-झोंक भी चालू थी।​इसी माहौल के बीच, सुमन जी ने अचानक तारा का हाथ अपने हाथ में लिया और मुस्कुराते हुए बोलीं, "सुधा, जिस तरह से तारा ने मेरी सेवा की है न, मेरा तो दिल करता है कि इसे हमेशा के लिए अपनी बहू बनाकर अपने ही घर